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सफर

अकेली चली थी अकेली चलूंगी। सफर के सहारों न दो साथ मेरा। सहज मिल सके, व नहीं लक्ष मेरा। बहुत दूर मेरी निशा का सवेरा। अगर थक गये हो तो लौट जाओ। गगन के सितारों न दो साथ मेरा। वो हौसला ही क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें। वो आत्मबल ही क्या जो अपनी मंज़िल भुला दे। वो कदम ही क्या जो अपने निशान न छोड़ पायें। मुस्कुराकर चल मुसाफिर , देर न कर तू ज़रा भी। तुझे अपने साया को अपना कारा बनाना है। तुझे इस दुनिया की मोह माया से दूर जाना है। तुझे अपनी मंज़िल ढूंढ पाना है। मुस्कुराकर चल मुसाफिर , देर न कर तू ज़रा भी।

Selling Childhood

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I saw a kid on the street Selling balloons to feed his need Lost his childhood in the street No schools no uniforms No playgrounds no pals Alone he is fighting with the world.  Life has taught him,  balloons  will only bring him meals Not fun and happiness like other kids So he departed it all, to them To wake up and continue again.